"है लिए हथियार दुश्मन ताक में बैठा उधर,
और हम तैयार हैं सीना लिए अपना इधर.
ख़ून से खेलेंगे होली ग़र वतन मुश्क़िल में है
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है"
बिस्मिल जी की इन पंक्तियों को कुछ राष्ट्रभक्त आज भी यथार्त रूप दे रहे हैं। "कैप्टेन विक्रम बत्रा"..एक अमर शहीद, जो बलिदान हुए हम सबकी मातृभूमि की रक्षा के लिए, सत्य की रक्षा के लिए, न्याय के लिए। अपने परिवार की, अपने सुख की तनिक भी परवाह किये बगैर चढ़ गए बलिवेदी पर ताकि हम-आप चैन से, सम्मान से जी सकें। ऐसा हर एक वीर ही मेरे लिए नायक है और मैं गर्व से कहता हूँ कि मैं इनका वंशज हूँ, इनका भाई हूँ। हम सीमा पर तो नहीं जा सकते परन्तु सामाजिक जीवन का निर्वहन करते हुए माँ भारती के सम्मान को ठेस ना पहुँचे, कम से कम इतना तो कर ही सकते हैं। सम्मान दें इन वीरों को, इनके परिवारों को और अपनी मातृभूमि को। कारगिल युद्ध में अपने साहस और शौर्य से दुश्मनों को पराजित कर वीरगति प्राप्त करने वाले माँ भारती के वीर सपूत, परमवीर चक्र से सम्मानित कैप्टेन विक्रम बत्रा के बलिदान दिवस पर उन्हें कोटिशः नमन एवं भावभीनी श्रद्धांजलि...।।ॐ।।
आदित्य विक्रम मालीवाल
चित्तौड़गढ़, राजस्थान।