इतिहास की उज्जवल आभा है,
इस संस्कृति का आधार है,
पहचानों जो डूब रहा है,
अपना वही बिहार है।
मगध पितामह भीष्म का,
यहाँ चन्द्रगुप्त का आसन है,
राजनीति कौटिल्य सिखाई,
मानवता का शासन है,
नालन्दा की भूमि है यह,
ज्ञान का भण्डार है,
पहचानों जो डूब रहा है,
अपना वही बिहार है।
बुद्ध दिया है दुनियाँ को,
मानवता का कल्याण किया,
राष्ट्र समर्पित है कण-कण,
सर्वोच्च सदा बलिदान दिया,
दिया जिन्होंने वर्षों तक,
आज उन्हें दरकार है,
पहचानों जो डूब रहा है,
अपना वही बिहार है।
जब देश में विपदा आई है,
हम सबने दिया सहारा है,
हो पूरब, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण,
मिलकर उसे उबारा है,
हाथ बढ़ाओ फिर से अपने,
संकट में परिवार हैं,
पहचानों जो डूब रहा है,
अपना वही बिहार है।
इतिहास की उज्जवल आभा है,
इस संस्कृति का आधार है,
पहचानों जो डूब रहा है,
अपना वही बिहार है।
आदित्य विक्रम मालीवाल ©
चित्तौड़गढ़, राजस्थान।