मंगलवार, 14 फ़रवरी 2017

"तुम ही हो धड़कन मेरी"

तुम ही हो धड़कन मेरी
हो तुम्हीं साँसें मेरी,
जीने लगता हूँ अचानक
देखूँ जब सूरत तेरी ।

हम मिले हैं जब
वो हर दीदार तेरा याद है,
सपने हों या हो हकीक़त
तुमसे ही आबाद है,
ज़िन्दगी के पल गुजारूँ
यादों में अब मैं तेरी,
तुम ही हो धड़कन मेरी
हो तुम्हीं साँसें मेरी ।

तू ही अन्ज़ाम-ए़-मोहोब्बत
तू ही है राह-ए़-खुदा,
एक पल भी जी ना पाऊँ
होके अब तुझसे जुदा,
मेरे दिल की खाली झोली
प्यार से तूने भरी,
तुम ही हो धड़कन मेरी
हो तुम्हीं साँसें मेरी ।

तू है नाज़ुक ख़्वाब सी
तू ही तो शब-ए़-नूर है,
ज़ुबाँ तेरी पाक तू
ज़न्नतनशीं कोई हूर है,
तुझमें दिखता रब मुझे
मैं हूँ तेरा तू है मेरी,
तुम ही हो धड़कन मेरी
हो तुम्हीं साँसें मेरी ।

जीने लगता हूँ अचानक
देखूँ जब सूरत तेरी ।

आदित्य विक्रम मालीवाल ©
चित्तौड़गढ़, राजस्थान ।