बुधवार, 27 जुलाई 2016

" कैसे हों आबाद !!"

चले गुरु और चेला जी
सब करने को बर्बाद,
जो अपनी जड़ ख़ुद खोदे
वह कैसे हों आबाद !!

तप खाया है उनका
कई रात नहीं जो सोये,
अभिमान बना आभूषण
ये सत्ता मद में खोये,
बन्द कानों से सुनना चाहें
पाञ्चजन्य का नाद,
जो अपनी जड़ ख़ुद खोदे
वह कैसे हों आबाद !!

राष्ट्रभक्ति मज़दूरी हो गयी
कई हैं ठेकेदार,
हर नुक्कड़ पर खड़े प्रवक्ता
करने बातें चार,
अध जल गगरी छलकत जाए
बढ़ते रहे विवाद,
जो अपनी जड़ ख़ुद खोदे
वह कैसे हों आबाद !!

अब भी समय है जागो भैया
व्यर्थ भँवर में फँसी है नैया,
याद करो पुरखों की ख्याति
कर विकास तुम बनों खिवैय्या,
जो ना सुधरे तो जड़ें ख़त्म
बस रह जायेगी खाद,
जो अपनी जड़ ख़ुद खोदे
वह कैसे हों आबाद !!

चले गुरु और चेला जी
सब करने को बर्बाद,
जो अपनी जड़ ख़ुद खोदे
वह कैसे हों आबाद !!


आदित्य विक्रम मालीवाल ©
चित्तौड़गढ़, राजस्थान |

मंगलवार, 26 जुलाई 2016

"विजय दिवस"

आज विजय दिवस है… आज ही के दिन भारतीय सेनाओं ने कारगिल युद्ध में विजय प्राप्त की थी। विजय दिवस मात्र इतना ही नहीं है, बल्कि यह एक स्मारक है अद्वितीय शौर्य का, राष्ट्रभक्ति का, निःस्वार्थ बलिदान का। साथ ही यह हमें याद दिलाता है स्वतंत्रता के समय और उसके बाद राजनीतिज्ञों, तथाकथित अहिंसावादी समाजसेवियों और सत्ता लोलुप शासकों द्वारा किये गए भयंकर अक्षम्य अपराधों की जिनका मूल्य हम लगातार चुकाते आ रहे हैं जिसका एक प्रत्यक्ष उदाहरण कारगिल युद्ध है। विजय दिवस सुनने में बहुत अच्छा लगता है, हम में से कुछ को गौरवान्वित भी करता है और गर्व होना भी चाहिए परन्तु जरा समझिए और महसूस कीजिये कि इस गर्व करने योग्य दिन तक खालुबार, टाइगर हिल्स, तोलोलिंग इत्यादि जो कि अधिकृत रूप से हमारे ही भू भाग हैं को पुनः प्राप्त करने हेतु सैंकड़ो वीर बलिदान हो गए, हजारों गंभीर रूप से घायल हुए, असंख्य सिपाही घाटियों से लौटे ही नहीं। अब जरा सोचिये कि अपने ही घर को बचाने में यदि आपके बच्चे, भाई-बहिन, परिवार सब बलिदान हो जाएँ और आपका घर बच जाए तो क्या सिर्फ गर्व करना आपके लिए पर्याप्त होगा ?? निश्चित रूप से भारत माता के उन सच्चे सपूतों का बलिदान सदैव अविस्मरणीय एवं गौरवान्वित करने योग्य था, है और रहेगा परन्तु हमें यह भी समझना होगा की सैनिक राष्ट्र की सेवा और रक्षा लिए होते हैं न की राजनैतिक गलतियों (अपराधों) की क्षतिपूर्ति लिए। भारतीय सेना के प्रति संवेदनशील बनिये, जहाँ से जैसे भी हो सकता है उनका मनोबल बढ़ाने का प्रयत्न कीजिये, उनके परिवारों की चिन्ता कीजिये, अपने नेताओं और महाज्ञानी मीडिआ के बन्धुओं को यह याद दिलाइये कि आज के दिन कोई कार्यक्रम करने या पुष्प अर्पित करने के साथ अगर शहीदों के परिवारों की सुध ही ले ली जाती तो अच्छा होता। मैं स्वयं नमन करता हूँ आज तक शहीद हुए भारत माता के सभी सपूतों को और प्रण लेता हूँ कि यथा सम्भव उनके एवं उनके परिवारों के हितार्थ कार्य करूँगा…||ॐ||

आदित्य विक्रम मालीवाल ©
चित्तौड़गढ़, राजस्थान ।

शनिवार, 23 जुलाई 2016

"ढूँढ फक़ीरा बन्द आँखों से ।"

बेईमानों की महफ़िल में, 
कोई तो होगा नेक ।
ढूँढ फक़ीरा बन्द आँखों से, 
मिल जाएगा एक...॥

किसको बोलें और क्या बोलें,
इस दुनियाँ में सब ज्ञानी हैं,
नेताओं को क्या गाली दें,
हम सबकी यही कहानी है,
सच्चाई को आग लगा बस,
बस अपनी रोटी सेक,
ढूँढ फक़ीरा बन्द आँखों से, 
मिल जाएगा एक...॥

मुल्क़ की रखते शान नहीं,
बच्चों, बूढ़ों का मान नहीं,
माँ, बेहनों का सम्मान नहीं,
"कचरा" हैं हम "इन्सान" नहीं ।
जो बनना है इन्सान तो मन का,
पाप तू बाहर फेंक ।
ढूँढ फक़ीरा बन्द आँखों से, 
मिल जाएगा एक...॥

मैंनें ज्यों ही बन्द की आँखें, 
कानों में गूँजी आवाज़ ।
कहे फक़ीरा झाँक ले अन्दर,
समझले अपने दिल का राज़ ।
छोड़ के दुनियाँ, पकड़ आईना, 
पहले खुद को देख ।
ढूँढ फक़ीरा बन्द आँखों से, 
मिल जाएगा एक...॥

कहे फक़ीरा अन्त समय,
बन्द आँखों से ही जाना है ।
खुली आँख जो जमा किया,
वह सब-कुछ यहीं चुकाना है ।
ऊपर वाले का काम करो,
बस वही रखेगा टेक ।
ढूँढ फक़ीरा बन्द आँखों से, 
मिल जाएगा एक...॥

बेईमानों की महफ़िल में, 
कोई तो होगा नेक ।
ढूँढ फक़ीरा बन्द आँखों से, 
मिल जाएगा एक...॥

आदित्य विक्रम मालीवाल ©
चित्तौड़गढ़, राजस्थान ।

शुक्रवार, 22 जुलाई 2016

"आत्मविश्वास"

चल निरन्तर बनके अर्जुन,
सूर्य के सम रथ मिलेगा ।
आज जो संकट लगे कल,
सफलता का पथ बनेगा ॥

आदित्य विक्रम मालीवाल ©
चित्तौड़गढ, राजस्थान ।

मंगलवार, 12 जुलाई 2016

"नयी सुबह, उम्मीद नयी ।"

सपने थे कुछ खट्टे-मीठे, गयी रात सब बीत गया,
एक सुबह उम्मीद भरी, यह जीने का पैगाम नया ।😊

आदित्य विक्रम मालीवाल ©
चित्तौड़गढ़, राजस्थान ।