बिखरे सुरों को हम साज़ लिखते हैं,
हरकत को आवाज़ लिखते हैं,
कल तक जो थी एक अधूरी नज़्म,
अरमानों की स्याही से उनको हम आज लिखते हैं..!!
आदित्य विक्रम मालीवाल ©
चित्तौड़गढ़, राजस्थान ।
बिखरे सुरों को हम साज़ लिखते हैं,
हरकत को आवाज़ लिखते हैं,
कल तक जो थी एक अधूरी नज़्म,
अरमानों की स्याही से उनको हम आज लिखते हैं..!!
आदित्य विक्रम मालीवाल ©
चित्तौड़गढ़, राजस्थान ।
कोई दलित है कोई सवर्णी, लड़ते रहो दिन-रात,
भारत माता रोए अकेली, बड़ी देश से जात !!
आदित्य विक्रम मालीवाल ©
चित्तौड़गढ़, राजस्थान ।
जो बनें सिकंदर किस्मत से, हर बात में खाए तैश !
खुदको ही समझे भगवन, ना अक्ल बड़ी ना भैंस !!!
आदित्य विक्रम मालीवाल ©
चित्तौड़गढ़, राजस्थान |
सज़ा का फरमान है
बीवी है या तूफ़ान है..!!
मूवी मुझे ले जाओगे
तुम हो कहाँ कब आओगे
खाना बनाके पूछती
तुम खाने में क्या खाओगे
जो कह दे वो ही ज्ञान है
सबसे बड़ी विद्वान है....!!!
सज़ा का फरमान है
बीवी है या तूफ़ान है..!!
मोदी, अटल जो बच गये
तो बिचारे कुछ बन गये
जो ना बचे वो भी बने
अब क्या बने ... वो जाने दो
यमराज को भी धो चुकी
सावित्री सी पहलवान है
सज़ा का फरमान है
बीवी है या तूफ़ान है..!!
जो ये कहे वो ही सही
जो जमा दे वो ही दही
इनसे बड़ा कोई नहीं
दुनिया इन्हीं से चल रही
भगवान भी जिससे डरे
वो एक ही इन्सान है
सज़ा का फरमान है
बीवी है या तूफ़ान है..!!
आदित्य विक्रम मालीवाल©
चित्तौड़गढ़, राजस्थान |
तस्वीर भले बदली हो मेरी, बदले हैं जज़्बात नहीं,
दिल से देखो साफ दिखूँगा, उजला दिन हूँ रात नहीं ॥
आदित्य विक्रम मालीवाल ©
चित्तौड़गढ़, राजस्थान ।