बुधवार, 24 अगस्त 2016

"दिल से"

बिखरे सुरों को हम साज़ लिखते हैं,
हरकत को आवाज़ लिखते हैं,
कल तक जो थी एक अधूरी नज़्म,
अरमानों की स्याही से उनको हम आज लिखते हैं..!!

आदित्य विक्रम मालीवाल ©
चित्तौड़गढ़, राजस्थान ।

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