सोमवार, 22 जून 2015

"Happy Father's Day"

प्रणाम उन निःस्वार्थ व्यक्तित्व को जो जीते हैं हमारे लिए, उनके होने का आभास मात्र ही कोटिशः सूर्यों की ऊर्जा से अधिक शक्तिशाली और ऊर्जादायक है । वैसे तो इस जीवन का कण कण आपका आभारी है पापा और मैं निरन्तर हर क्षण आपको ही नमन करता हूँ, फिर भी "पितृ दिवस" पर आपको सहृदय प्रणाम, हर उस पिता को प्रणाम जो जीते हैं परिवार के लिए.. Love You "PAPA" ..Happy Father's Day...:)

आदित्य विक्रम मालीवाल©
चित्तौड़गढ़, राजस्थान ।

रविवार, 21 जून 2015

"अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस"

“सर्वे भवन्तु सुखिनः। सर्वे सन्तु निरामयाः। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु। मा कश्चित् दुःख भाग्भवेत्..॥ॐ॥
(May all be happy. May all remain free from disabilities. May all see auspicious things. May none suffer sorrows.)”

"पहले करें योग, फिर लगाएँ भोग"

आदित्य विक्रम मालीवाल©
चित्तौड़गढ़, राजस्थान ।

शुक्रवार, 12 जून 2015

"बाल मज़दूरी... एक अपराध, एक श्राप"

"ए सुन, शुश-शुश, ओये छोटू,
ज़रा ये लाना, ज़रा वो लाना,
क्या यह हमारी इन्सानियत है?
बच्चों से मज़दूरी करवाना ??

न नौकरी देने वाला शर्माए,
न काम लेने वाला शर्माए,
और कोई मासूम बचपन,
गरीबी और लाचारी के दलदल में फसता जाए !!!

क्यों न हम सब मिलकर आगे आयें,
अपनी झूठी इन्सानियत को सच्चा बनायें,
किसी मासूम का हाथ पकड़,
कुछ ऐसा करें की उसकी ज़िन्दगी बन जाए ।

सिर्फ बच्चों से काम न लेना,
नहीं है सम्पूर्ण उपाय,
हो सके तो उनमें,
पढ़ने लिखने की अलख जगाएँ ।

बालश्रम और बच्चों पर अन्याय को तो,
जड़ मूल से मिटाना ही है,
साथ में बच्चों को ,
रोटी, कपड़ा और छत देकर पढ़ाना भी है ।

आओ मिलकर प्रण करें,
कम से कम एक मासूम को तो बचायेंगे,
बाल मज़दूरी को रोक इन्हें पढ़ाएंगे-लिखाएँगे,
और देश का भविष्य बनायेंगे...।।"


बाल मज़दूरी का विरोध करें, उन प्रतिष्ठानों का विरोध करें जो बच्चों के जायज़ अधिकारों का हनन कर उनसे मज़दूरी करवाते हैं और ऐसे लोगों को बहिष्कृत करें जो स्वयं की आवश्यकताओं की पूर्ती के लिए बालश्रम को बढ़वा देते हैं। साथ ही साथ अगर आपकी आर्थिक या सामाजिक स्थिति इस योग्य है कि किसी बच्चे को आप सहायता कर सकते हैं तो अवश्य करें। ईश्वर का कार्य है किसी बच्चे का जीवन बनाना । चाहे कोई और पुण्य ना करें परन्तु इन बच्चों का जीवन बनाने का यथा सम्भव प्रयास करें ।

आदित्य विक्रम मालीवाल ©
चित्तौड़गढ़, राजस्थान ।

मंगलवार, 9 जून 2015

"बोल फक़ीरा-३"

चली गोलियाँ कभी इधर से, चली गोलियाँ कभी उधर से,
कभी सिपाही, कभी नक़्सली, बस मरते अपने लोग ।
गोरों के पापी कर्मों ने, और कुछ गद्दार निकम्मों ने,
बाँट दिया मेरे भारत को, दिया है ऐसा रोग ।

आदित्य विक्रम मालीवाल ©
चित्तौड़गढ़, राजस्थान ।

गुरुवार, 4 जून 2015

"बोल फक़ीरा-२"

मूफत सबको चाहिये, मेहनत ना किसी से होए,
पूछ फक़ीरा इन मंगतो को, देश कहाँ तक ढोए ।

आदित्य विक्रम मालीवाल©
चित्तौड़गढ़, राजस्थान ।

मंगलवार, 2 जून 2015

"बोल फक़ीरा-१"

"कहे फक़ीरा कलजुग में हर कोई है विद्वान,
खुद कुछ अपनाना नहीं, बस, दुनियाँ को दीजै ज्ञान ।"