बुधवार, 30 दिसंबर 2015

"बोल फकीरा-७"

मैं कहाँ गलत था पता नहीं, क्यों अपने मुझसे रूठ गये,
नासमझी की हद देखो, वो मेरा सब कुछ लूट गये ।

आदित्य विक्रम मालीवाल ©
चित्तौड़गढ़, राजस्थान ।

मंगलवार, 29 दिसंबर 2015

"बोल फक़ीरा-६"

"कुछ अन्जाने अपनों ने, मेरे सपनों को तोड़ दिया..
जिसे दिखाई राह उसने, गुमराह किया और छोड़ दिया ..!!!

आदित्य विक्रम मालीवाल ©
चित्तौड़गढ़, राजस्थान ।

रविवार, 27 दिसंबर 2015

"कविताएँ मैं ही लिखता हूँ ।"

ईमानदार कुछ हैं कहते
कुछ को धोखे सा दिखता हूँ,
पर सच कहता हूँ झूठ नहीं
कविताएँ मैं ही लिखता हूँ..!!

मुँह खोले बिन बोले चेहरा
हर बात जो है मेरे दिल में,
शक़ करने वाले फिर भी हैं
अपनों की ही इस महफ़िल में,
वफ़ा मैं जिसको पेश करूँ
उसको ही बेवफ़ा दिखता हूँ,
पर सच कहता हूँ झूठ नहीं
कविताएँ मैं ही लिखता हूँ..!!

ना जाने दुनियाँ है कैसी
खुदने ईमाँ को छोड़ दिया,
और मेरे सच्चे सपनों को
बस सपना कहकर तोड़ दिया,
टूटे सपनों के मेले में
ईमान सहित मैं बिकता हूँ,
पर सच कहता हूँ झूठ नहीं
कविताएँ मैं ही लिखता हूँ..!!

चाहे दुनियाँ बदनाम करे
दिल बड़ा रखूँ और माफ करूँ,
आईना चाहे हो गन्दा
बस अपना चेहरा साफ करूँ,
ठुकराए किस्मत बिना वजह
हिम्मत कर आगे बढ़ता हूँ
और सच कहता हूँ झूठ नहीं
कविताएँ मैं ही लिखता हूँ..!!

ईमानदार कुछ हैं कहते
कुछ को धोखे सा दिखता हूँ,
पर सच कहता हूँ झूठ नहीं
कविताएँ मैं ही लिखता हूँ..!!

आदित्य विक्रम मालीवाल ©
चित्तौड़गढ़, राजस्थान ।

सोमवार, 21 दिसंबर 2015

ज़ुल्म की है इन्तेहाँ !!

ज़ुल्म की है इन्तहाँ
सो रहा है ये जहाँ
पूछता है आज शायर
ऐ ख़ुदा तू है कहाँ..!!

बेटियों को कोख में ही
मारने की सोचते हैं
और जो ज़िन्दा बची हैं
रोज उनको नोचते हैं
इन्साँ नहीं हम जानवर हैं
शर्मों हया अब है कहाँ..!!
ज़ुल्म की है इन्तहाँ
सो रहा है ये जहाँ |

देवियाँ कहते इन्हीं को
दुर्गा कहकर पूजते हैं
और जब मौका लगे
इज्ज़त इन्हीं की लूटते हैं
हैवानों का है बोलबाला
इन्साँनियत अब है कहाँ..!!
ज़ुल्म की है इन्तहाँ
सो रहा है ये जहाँ |

अस्मत किसी की रोज लुटती
क्यों नहीं आवाज़ उठती
खून क्यों सबका न खौला
मर्द असली क्यों न बोला
रूह रो रो कर पुकारे
कोई समेटो सिसकियाँ..!!
ज़ुल्म की है इन्तहाँ
सो रहा है ये जहाँ |

पूछता है आज शायर
ऐ ख़ुदा तू है कहाँ..!!


आदित्य विक्रम मालीवाल ©
चित्तौड़गढ़, राजस्थान |

सोमवार, 14 दिसंबर 2015

"बोल फक़ीरा-५"

बुरे वक़्त में करे भरोसा,
दोस्त वही कहलाएगा ।
इस फक़ीर का वादा तुमसे,
यारी सदा निभाएगा ।

आदित्य विक्रम मालीवाल©
चित्तौड़गढ़, राजस्थान ।

रविवार, 6 दिसंबर 2015

"राही की ज़िन्दगी"

हर कदम उस राही का,
मुझ रास्ते को रौंदते हुए गुज़रे ,
जिसे दिखती हो मंज़िल उसकी,
मेरे करम से उसकी ज़िन्दगी निखरे ।

आदित्य विक्रम मालीवाल©
चित्तौड़गढ़, राजस्थान ।