रविवार, 27 दिसंबर 2015

"कविताएँ मैं ही लिखता हूँ ।"

ईमानदार कुछ हैं कहते
कुछ को धोखे सा दिखता हूँ,
पर सच कहता हूँ झूठ नहीं
कविताएँ मैं ही लिखता हूँ..!!

मुँह खोले बिन बोले चेहरा
हर बात जो है मेरे दिल में,
शक़ करने वाले फिर भी हैं
अपनों की ही इस महफ़िल में,
वफ़ा मैं जिसको पेश करूँ
उसको ही बेवफ़ा दिखता हूँ,
पर सच कहता हूँ झूठ नहीं
कविताएँ मैं ही लिखता हूँ..!!

ना जाने दुनियाँ है कैसी
खुदने ईमाँ को छोड़ दिया,
और मेरे सच्चे सपनों को
बस सपना कहकर तोड़ दिया,
टूटे सपनों के मेले में
ईमान सहित मैं बिकता हूँ,
पर सच कहता हूँ झूठ नहीं
कविताएँ मैं ही लिखता हूँ..!!

चाहे दुनियाँ बदनाम करे
दिल बड़ा रखूँ और माफ करूँ,
आईना चाहे हो गन्दा
बस अपना चेहरा साफ करूँ,
ठुकराए किस्मत बिना वजह
हिम्मत कर आगे बढ़ता हूँ
और सच कहता हूँ झूठ नहीं
कविताएँ मैं ही लिखता हूँ..!!

ईमानदार कुछ हैं कहते
कुछ को धोखे सा दिखता हूँ,
पर सच कहता हूँ झूठ नहीं
कविताएँ मैं ही लिखता हूँ..!!

आदित्य विक्रम मालीवाल ©
चित्तौड़गढ़, राजस्थान ।

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