"दिल से आवाज़ है जब उठती, ये कवि कविता लिखता है, दीवानो की इस महफ़िल में, वो एक तो उसकी सुनता है, पढ़कर मेरी कविताओं को, कोई मुझको भी समझेगा, उम्मीद का दामन थाम कवि, आग़ाज़ यहीं से करता है" . . . . आदित्य विक्रम मालीवाल© चित्तौड़गढ़, राजस्थान ।
मैं कहाँ गलत था पता नहीं, क्यों अपने मुझसे रूठ गये, नासमझी की हद देखो, वो मेरा सब कुछ लूट गये ।
आदित्य विक्रम मालीवाल © चित्तौड़गढ़, राजस्थान ।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें