मंगलवार, 9 जून 2015

"बोल फक़ीरा-३"

चली गोलियाँ कभी इधर से, चली गोलियाँ कभी उधर से,
कभी सिपाही, कभी नक़्सली, बस मरते अपने लोग ।
गोरों के पापी कर्मों ने, और कुछ गद्दार निकम्मों ने,
बाँट दिया मेरे भारत को, दिया है ऐसा रोग ।

आदित्य विक्रम मालीवाल ©
चित्तौड़गढ़, राजस्थान ।

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