शुक्रवार, 19 अगस्त 2016

"हुनर का सही आँकलन"

भारतवर्ष में प्रायः अभिभावक (Parents) बिना अपने बच्चों की क्षमता और गुणों का आँकलन किये हुए, पहले सामाजिक/पारिवारिक प्रतिष्ठा और बाद में क्रमशः आर्थोत्प्रेरित (Socio-Economic) जीवन व्यवस्था को मापदण्ड (Parameteres) बना सदैव उनसे परिणाम ही माँगते हैं । कुछ अभिभावक तो स्नेह की परिभाषाएँ तक उक्त नियमों के अनुसार गड़ देते हैं !! पीढ़िया बरबाद हुए जा रही है किन्तु सोच नहीं बदल रही !! रहम कीजिए अपनी सन्तति (Child) पर और उसके लिए जोड़ने की जगह उसे जो ईश्वर ने दिया है या उसने जो हुनर स्वयं विकसित किया है के अनुसार आगे बढ़ने में सहयोग कीजिए । जीवन भर बालक/बालिका आपका और आपके त्याग का सम्मान करेंगे । थोड़े में जियेंगे लेकिन कर्मठ होकर जियेंगे । किन्तु अब भी जो अभिभावक इन बातों को ना समझना चाहें या इन तथ्यों पर बहस करना चाहें तो साहेब विश्वास कीजिए, आपका यह नासमझी भरा असमंजस जो ना जाने कितने हुनरमन्दों को मैदान में उतरने या अपने हुनर को निखारने का प्रयास करने से पहले ही डरा-डरा कर खत्म करता आया है, वह आगे भी करता रहेगा । साथ ही आपके त्याग के प्रति बच्चे के मन में जो सम्मान स्वाभाविक रूप से आना चाहिए वह सम्मान भी शनैः शनैः नष्ट हो जाएगा !! निवेदन है, समझिए, अपनों से प्रदत्त मनोबल की छाया में क्षमतानुसार प्रयास करना ही सर्वाधिक महत्वपूर्ण है, फिर परिणाम चाहे जो आये, उसमें सन्तोष होगा ही, साथ में ऐसे हुनर भी मिलते रहेंगे । गर्व है सिंधु सहित समस्त खिलाड़ियों एवं हुनरमन्दों पर ।

आदित्य विक्रम मालीवाल ©
चित्तौड़गढ़, राजस्थान ।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें