आज विजय दिवस है… आज ही के दिन भारतीय सेनाओं ने कारगिल युद्ध में विजय प्राप्त की थी। विजय दिवस मात्र इतना ही नहीं है, बल्कि यह एक स्मारक है अद्वितीय शौर्य का, राष्ट्रभक्ति का, निःस्वार्थ बलिदान का। साथ ही यह हमें याद दिलाता है स्वतंत्रता के समय और उसके बाद राजनीतिज्ञों, तथाकथित अहिंसावादी समाजसेवियों और सत्ता लोलुप शासकों द्वारा किये गए भयंकर अक्षम्य अपराधों की जिनका मूल्य हम लगातार चुकाते आ रहे हैं जिसका एक प्रत्यक्ष उदाहरण कारगिल युद्ध है। विजय दिवस सुनने में बहुत अच्छा लगता है, हम में से कुछ को गौरवान्वित भी करता है और गर्व होना भी चाहिए परन्तु जरा समझिए और महसूस कीजिये कि इस गर्व करने योग्य दिन तक खालुबार, टाइगर हिल्स, तोलोलिंग इत्यादि जो कि अधिकृत रूप से हमारे ही भू भाग हैं को पुनः प्राप्त करने हेतु सैंकड़ो वीर बलिदान हो गए, हजारों गंभीर रूप से घायल हुए, असंख्य सिपाही घाटियों से लौटे ही नहीं। अब जरा सोचिये कि अपने ही घर को बचाने में यदि आपके बच्चे, भाई-बहिन, परिवार सब बलिदान हो जाएँ और आपका घर बच जाए तो क्या सिर्फ गर्व करना आपके लिए पर्याप्त होगा ?? निश्चित रूप से भारत माता के उन सच्चे सपूतों का बलिदान सदैव अविस्मरणीय एवं गौरवान्वित करने योग्य था, है और रहेगा परन्तु हमें यह भी समझना होगा की सैनिक राष्ट्र की सेवा और रक्षा लिए होते हैं न की राजनैतिक गलतियों (अपराधों) की क्षतिपूर्ति लिए। भारतीय सेना के प्रति संवेदनशील बनिये, जहाँ से जैसे भी हो सकता है उनका मनोबल बढ़ाने का प्रयत्न कीजिये, उनके परिवारों की चिन्ता कीजिये, अपने नेताओं और महाज्ञानी मीडिआ के बन्धुओं को यह याद दिलाइये कि आज के दिन कोई कार्यक्रम करने या पुष्प अर्पित करने के साथ अगर शहीदों के परिवारों की सुध ही ले ली जाती तो अच्छा होता। मैं स्वयं नमन करता हूँ आज तक शहीद हुए भारत माता के सभी सपूतों को और प्रण लेता हूँ कि यथा सम्भव उनके एवं उनके परिवारों के हितार्थ कार्य करूँगा…||ॐ||
आदित्य विक्रम मालीवाल ©
चित्तौड़गढ़, राजस्थान ।
चित्तौड़गढ़, राजस्थान ।
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