आप कुछ भी कहें वो बोल,
और हम कहें तो ट्रोल !!
आपकी माँगे विकास और आज़ादी,
हम माँगे तो गुण्डई और बर्बादी !!
इनकी बकवास भी कूल,
हमारा प्रामाणिक ज्ञान बस ऊल-जुलूल !!
इनके ग़लत "बिचारे नादान",
और हमारे सही भी "ग़लत इन्सान" !!
"लुकिन हॉट" सुनते ही आये चेहरे पे लाली,
हमारा "भैयाजी/बहनजी" कहना जैसे देसी गाली !!
जो कपड़े उतारे वो "डूड",
जो पहनने को कह दे वो "रूड" !!
वाह रे वामपंथी-फ़ेमिनिस्ट जीवों,
कभी दारू की जगह छाछ भी पीवो !!
थोपते तुम हो, हम तो बचाते हैं,
खुले विचार सीमा में हों तो हम भी अपनाते हैं !!
षड्यंत्र तुम्हारे, मूर्खता हमारी,
जो इतनी फैल गई यह वैचारिक बीमारी !!
ग़लत तुम्हारे ज़्यादा हैं, सही हम भी नहीं हैं सारे,
हम ही अपना भूल रहें हैं, इसीलिए हैं हारे !!
समय अब भी है पहले स्वयं को सुधारें,
जो भटक गये हैं भाई-बहन उन्हें दिल से पुकारें !!
एक बार को छोड़ के गर्मी ठण्डे दिल से सोचें,
हम बड़े दिल के भारतीय हैं नहीं है ओछे !!
ख़ुद भी समझें दूसरों को भी समझाएँ,
संयम और सीमाओं को सनक से बचाएँ !!
गाली-गलौज से दूर रहें, तर्क में मधुरता लाएँ,
जमकर बहस करें किन्तु सभ्यता ना भुलाएँ !!
आओ हमारी संस्कृति को सही तरीक़े से पेश करें,
चाहे विरोधी हो या हो शत्रु, नहीं किसी से द्वेष करें !!
बहुत ऊँची है हमारी भारतीयता, झूठों से नहीं मिट पाएगी,
पहले हमें अपनाना होगा, तभी दूसरों को समझ में आएगी !!
आदित्य विक्रम मालीवाल ©
चित्तौड़गढ़, राजस्थान ।
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