गुरुवार, 22 जून 2017

सीख रहा हूँ - (10)

खुले मन से की जाए वह सहायता है, कुण्ठित मन से तो एहसान ही किये जाते हैं 

आदित्य विक्रम मालीवाल ©
चित्तौड़गढ़, राजस्थान ।

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