कोटि कोटि वन्दन भारत माँ को, नमन है स्वातंत्र्य संग्राम में शहीद हुए एवं सदैव संघर्षरत् रहे माँ भारती के समस्त सपूतों को। जो मिला है उसका उत्सव आज मनाया जा रहा है, परन्तु जो हमसे अलग कर दिया गया था, छीन लिया गया था उसे प्राप्त किये बिना यह स्वतंत्रता अधूरी है। जो भारत माता की स्वतंत्रता के लिए लड़े, वे भारत के इस तथाकथित स्वतन्त्र कहे जाने वाले वर्तमान स्वरुप के लिए नहीं लड़े थे, उन्होंने जिस भारत के स्वतन्त्र स्वरुप की कल्पना की थी वो तो हमें अब बनाना है। छोटी छोटी बातों से ही प्रारम्भ कर हम भारत माँ को विश्ववंदनीय जगदगुरु के रूप में स्थापित करके रहेंगे। प्रण करते हैं अखण्ड सांस्कृतिक भारत के निर्माण का। जय हिन्द, जय भारत..।।ॐ।।
आदित्य विक्रम मालीवाल
चित्तौड़गढ़, राजस्थान ।
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