मंगलवार, 25 अगस्त 2015

"बोल फक़ीरा-४"

छोड़ के दुनिया की परवाह, ईमान से मन की कर,
रक्ख़ फक़ीरी अपने मन में, भूल तू सारे डर..॥

आदित्य विक्रम मालीवाल ©
चित्तौड़गढ़, राजस्थान ।

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