एक तूफाँ दिल में है
बेरुखी मेहफ़िल में है..!
इक ज़माना वो भी था
थे हमीं आँखों के तारे,
ज़ुबाँ पे भी बस हमीं थे
हम थे सबके, सब हमारे,
खुशियों का दरिया उफनता
रंजो-ग़म साहिल पे है,
एक तूफाँ दिल में है
बेरुखी मेहफ़िल में है..!
बदली करवट कब समाँ ने
क्या हुआ यह कौन जाने,
था भरोसा खुदा पे
करने लगा वो भी बहाने,
हाल-ए-किस्मत की है सज़िश
अपने भी शामिल से हैं,
एक तूफाँ दिल में है
बेरुखी मेहफ़िल में है..!
बीते लम्हों का तसव्वुऱ
आज भी लफ्ज़े ज़ुबाँ है,
जो हमें करती बयाँ
वो दासताँ हमसे खफ़ा है,
साफ दिल की आज पहचाँ
सूरत-ए-कातिल से है,
एक तूफाँ दिल में है
बेरुखी मेहफ़िल में है..!
आदित्य विक्रम मालीवाल©
चित्तौड़गढ़, राजस्थान |
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