अपनी खोई पहचान को, गर्व से अपनाना है,
अब “इण्डिया" को “भारत" बनाना है..॥
श्रीमति के श्रीमान् से
मिसेज़ के मिस्टर हो गये,
भारतीय बहिन-भाई से
इण्डियन ब्रदर-सिस्टर हो गये,
माँ बनी मोम और
ज़िन्दा बाप डेड हो गये,
भारतीयों की पहचान काले बाल,
बरगेंडी या रेड हो गये,
रंग बदल लो चाहे नाम
रक्त वही रह जाना है,
अब “इण्डिया" को “भारत" बनाना है..॥
इण्डियन “कल्चर" की अजब ख्याती है
इन्हीं के बनाये ब्रदर हुए ब्रो और
सिस्टर सिस हो जाती है,
मिसेज़ अचानक मिस हो जाती है,
और मिस्टर के तो क्या कहने
स्त्री हो चाहे धन
हमेशा पराये पे ही नजर जाती है,
बच्चों और बड़ों का लिहाज रहा नहीं
“यूथ" को नंगा होने में भी शर्म नहीं आती है,
इन्हीं युवाओं को पुनः वस्त्र पहनाना है,
अब “इण्डिया" को “भारत" बनाना है..॥
मूल समस्या ये है मित्रों
हम समझना नहीं हैं चाहते,
आन्दोलन और बदलाव की बात करने वाले
अक्सर कान बन्द करके हैं चिल्लाते,
अस्तित्व तक का पता नहीं
मित्रों कौन सी व्यवस्था बनाओगे,
वर्षों की पहचान को खोकर
क्या बदलाव ला पाओगे,
"भारत" नाम से जुड़ा बहुत कुछ
कला, संस्कृति और विज्ञान,
500 साल से नहीं हमारी
युगों-युगों से है पहचान,
इसी पहचान का सत्य समझकर
हर भारतीय को समझाना है,
अब “इण्डिया" को “भारत" बनाना है..॥
अपनी खोई पहचान को, गर्व से अपनाना है,
अब “इण्डिया" को “भारत" बनाना है..॥
आदित्य विक्रम मालीवाल©
चित्तौड़गढ़, राजस्थान ।
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