बुधवार, 16 मार्च 2016

"मस्तक सदा ऊँचा रहेगा ।"

साँझ बन जो ढल चुका है, सूर्य वह कल फिर उगेगा ।
जो पिघल कर बह गया है, बर्फ बन वह फिर जमेगा ।
धैर्य ज्योति को जला विश्वास तुम इतना रखो,
अपने भारत देश का, मस्तक सदा ऊँचा रहेगा.. ॥ॐ॥

आदित्य विक्रम मालीवाल ©
चित्तौड़गढ़, राजस्थान ।

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